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इस माह की १० सबसे लोकप्रिय रचनायें
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इश्क की दहलीज भाषा नैनो की जिनको आती है बिन चीनी की , चाय भी उन्हें भाती है मिलते हैं ऐसे हर गलियों में जैसे भंवरे हैं हर कलियों में कुछ...
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करतार सिंह सराभा 15 अगस्त 1947 की वह सुबह पूरे भारतवासियों के लिए न केवल आजादी के खूबसूरत एहसास से भरी थी, बल्कि दिलों में एक कसक लिए हुए ...
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आजकल मैं अर्नब द्वारा की जाने वाली पत्रकारिता से पूर्ण रूप से सहमत नहीं रहता हूँ , लेकिन कांग्रेस की दमनकारी नीती देखकर कहीं ना कहीं ...
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घर के मंदिर में भगवान श्रीराम की भक्ति भाव से भरे दादा जी ने श्री रामचरितमानस खोलते हुए अपने ७ साल के पोते से पूछा, '' पोते, बताओ तो...
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नया दौर naya dour हम भी नए थे कभी इस शहर में फरबरी माह में वो मिली थी कभी बीच राह में मुंह का ढक्कन खुल गया था और आँ...
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अच्छे दिन good days मुझे याद है की सन 2014 मे आम आदमी जितना उत्साहित था उतना उत्साह अपनी लॉट्री निकलने पर भी नही होता होगा . यही ...
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कोरोना , मजदूर और जिंदगी घर पर रहते हुए भी सुकून का ना होना मजदूरो और कामगारो के लिए कोई नया नहीं है | लेकिन कोरोना से बचने के चक्कर में ...
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उफ्फ ये बेरोजगारी - uff ye berojgari कहते है खाली दिमाग शैतान का पर इस दिमाग में भरे क्या ? जबसे इंडिया में स्किल डिव्ल्पमें...
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रचनाकार: संस्मरण लेखन पुरस्कार आयोजन - प्रविष्टि क्र. 58 : ... : प्रविष्टि क्र. 58 फर्ज़ रोहित राय कहते हैं कि मन का हो तो अच्छा न हो तो ज...
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