gorakhpur to lucknow

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गोरखपुर से लखनऊ 

गोरखपुर से लखनऊ 


स्टेशन  पे गाड़ी की सीटी के साथ ही मेरी ट्रेन भी   धीरे - धीरे रफ़्तार पकड़ने लगी। घर से बाहर ये मेरा पहला कदम था कारण लखनऊ में मेरा एडमिशन एक इंजीनियरिंग कॉलेज में हुआ था और कल उसकी रिपोर्टिंग है। घर पे अकेले होने और पिता जी की तबियत ख़राब होने के कारण गोरखपुर से लखनऊ तक का सफर मुझे अकेले ही तय करना पड़ा। पारिवारिक स्थिति ठीक न होने के कारण सबकी उम्मीदे मुझी से थी। फिलहाल ट्रेन के जनरल कम्पार्टमेंट में सवार मैं खड़ा - खड़ा ही अपने भविष्य  के सपने बुनने में व्यस्त था तभी पीछे से किसी  की आवाज आई पीछे मुड़के देखा तो एक लड़की आगे बढ़ने का रास्ता मांग  रही थी। 

काली आँखे ,गुलाबी गोरापन और सुंदर मुखड़े को मैं अनायास ही   ध्यान से देखने लगा उसके चेहरे की सादगी देख के अचानक मुझे लगा की जैसे ज़िन्दगी कुछ कह रही है और मैं ध्यान से सुन रहा हूँ मैं उसको रास्ता देते हुए  किनारे   हो  गया।  अब तो गोरखपुर से लखनऊ का सफर सुहाना सा लगने लगा था। दिल में एक अलग ही उमंग थी कई तरह के सपने भी देखने चालू हो गए। थोड़ी देर बाद वो लड़की वापस आई और बगल से होते हुए मेरे पीछे वाली सीट पे ही बैठ गई ,शायद मैंने पहले पीछे मुड़  के देखा ही नहीं था नहीं तो पहले ही  उसे देख लेता खैर अभी ट्रेन की रवानगी हुए कुछ ही समय हुआ था।  फिर तो मैंने भी अपनी दिशा बदल ली और अपनी नजरे उसकी ओर कर ली , कई बार हमारी नजरे आपस में टकराई पर उन नजरो में नजाकत और शराफत दोनों ही भरी हुई थी और लग रहा था साथ में कुछ अलग एहसास की शुरुआत भी हो रही थी शायद यही पहली नजर का  प्यार है।

 बस्ती  स्टेशन पे कुछ सवारियों के उतरने से मुझे उसके सामने वाली ही सीट मिल गई  मुझे लगा जैसे ईश्वर ने मेरी मुराद ही पूरी कर दी अब वो मेरी नजरो के ठीक सामने ही थी। इशारो ही इशारो में मुझे पता चला की वो भी अपनी मौसी के साथ लखनऊ ही जा रही थी और लखनऊ  में अपनी मौसी के साथ रहकर यूनिवर्सिटी से बी काम प्रथम वर्ष की छात्रा थी। 

उसकी मौसी बहुत ही कड़क मिजाज की थी इसलिए वार्तालाप का माध्यम इशारा ही  था। लखनऊ आते आते हमने एक दुसरे का पता ले लिया था जिससे की हम मिल सके ,लखनऊ स्टेशन पहुंचने पे ऐसा लगा जैसे पूरा सफर सिर्फ चंद लम्हो ही का था ,स्टेशन पे विदा होते समय एक अजीब मायूसी थी, लग रहा था मानो कोई हमसे हमारा सब - कुछ लेके जा रहा है उसकी आँखों में भी एक अजीब सी नमी थी। इत्मीनान बस इतना ही था की अगली मुलाक़ात  की गुंजाइश बची हुई थी। और इन्ही अगली मुलाकातों ने उसे ज़िन्दगी भर के लिए मेरा हमसफ़र बना दिया। आज भी हम वो पहली मुलाक़ात और गोरखपुर से लखनऊ का सफर याद करके रोमांचित हो उठते है। 

आरम्भ - मैं और वो 
  

after valentine

किस्सा वैलेंटाइन डे के बाद का -  




हाँ तो आप लोगो को  वैलेंटाइन दिन वाले दिन तो हमारी और कमला की कहानी पता चली  थी , पर उसके बाद क्या हुआ इसको बताने में इतनी देर इस  वजह से हुई की भैया  अस्पताल से ठीक होने में थोड़ा टाइम लग गया। 
अब आप ये सोच रहे है  की हमारी कुटाई हो गई थी  तो बिलकुल सही सोच रहे है।  दरअसल वैलेंटाइन डे वाले दिन कमला को  देखते ही हमरे प्यार का थर्मामीटर इतना हाइ हो गया था की कमला को  सीट पे बैठाने  के बाद हमारी साइकिल की स्पीड 60 किलोमीटर / घंटा हो गई थी , और हम कुछ ही देर में शहर के गुरमुटिआ पार्क आ पहुंचे। पार्क लैला - मजनुओं से खचाखच  भरा हुआ था ,तरह - तरह के दिल के आकर वाले गुब्बारे हाथ में लेके लइका - लईकी  घूम रहे थे , हम तो सीधे कलेजा हथेली पे रखके आये थे अब  इतना तगड़ा बंदोबस्त होने के बाद इस तरह के पार्क में आना कलेजा हाथ में रखके आना ही तो  हुआ। हां तो पार्क में तरह - तरह के नमूने भी देखने को मिले कई ठो  ऐसे मिले की विश्वास हो गया की प्यार अँधा होता है अब हो काहे न एक खूबे सुन्दर लईकी बानर जइसे लइका के हाथ में हाथ डाले घूम रही थी देखे तो लइका का किनारे का बाल पूरा सफाचट था सिर्फ बीच में कुछ बचा था वो भी खड़ा। मेकअप तो इतना पोत के घूम रहीं  थी लोग की अगर भगवान् बरस जाते तो  हरी - हर घांस सफ़ेद हो जाती और चेहरा यूपी के सड़क जैसा। 

मुंह से जानू  - सोना  करके चाशनी इतना झर  रहा था की लगा की आज  के बाद प्यार  करने को ही नहीं मिलेगा। खैर हमको दुसरे से क्या करना था हमको लगा इहा ज्यादा देर रहना सुरक्षित नहीं इसलिए हम अपनी बुद्धि पे भरोसा करके उहा  से खिसक लिए और पहुँच गए गोलगप्पा खाने वहाँ पे भी उहे हाल जल्दी - जल्दी गोलगप्पा खाने के बाद  निरहुआ का एक ठो सिनेमा देखे चल दिए टिकट हम पहले ही खरीद लिए थे वो भी किनारे वाला। आज के दिन का पूरा प्लानिंग हम पहले ही कर लिए थे हाँ सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए  एक ठो  बुरका भी साथ लाये थे। फिलम शुरू होते ही हाल में सीटी और ताली का  आवाज शुरू हो गया  हम भी निश्चिंत होक कमला से बतियाने  लगे। लगा की आज पूरा   मेहनत स्वार्थ हो गया।


 तभी पता नहीं कहा से जोर - जोर से आवाज आने लगी देखे तो हमारी सिट्टी - पिट्टी  गुम , हाल पे बजरंग दल वाले पूरी बटालियन लेके आ गए थे उधर परदे पे निरहुआ का एक्शन सीन शुरू हुआ और  इहा हकीकत में ,बुर्का पहिनने का मौका भी नहीं मिला। सीन जबतक ख़तम हुआ तब - तक हमरा पुर्जा - पुर्जा हिल चुका था और मुंह से बस इहे  निकला  -  हे राम ...... 


मजेदार पढ़े    -  #वैलेंटाइन दिवस के पटाखे

 

neerav modi


नीरव मोदी ढूंढो तो जाने ( India Searching Neerav modi) 


neerav modi
साभार et  

 इधर कुछ दिनों से मीडिया में बैंकिंग क्षेत्र के सबसे बड़े घोटाले और घोटालेबाज को लेकर जोर शोर से हल्ला मचा हुआ है। मीडिया और  सोशल मीडिया में जाँच रिपोर्ट आने से पहले अपने अपने तरीके से कभी कांग्रेस को तो कभी बीजेपी को दोषी ठहराया जा रहा है।  कुछ लोग मोदी की प्रसंशा करते हुए कह रहे थे की मोदी ने कांग्रेस काल में चल रहे घोटाले को पकड़ा है। तो कुछ के अनुसार घोटाला बीजेपी काल का है। 
ये तो मीडिया है जो की राजनीतिक रूप से प्रबंधित  है इसलिए उनका विश्लेषण उनके नियंत्रणकर्ताओ  द्धारा नियंत्रित  होता है। सोशल मीडिया को भी राजनीतिक रूप से साइबर सेल द्वारा दिशा देने की कोशिश की जाती है।  पर संख्या अधिक होने के कारण ऐसा पूर्ण रूप से नहीं हो पाता। 

पर वास्तविकता यह है की घोटाला तो हुआ है और इसमें पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी  से लेकर  अधिकारी तक की मिलीभगत तय है नीरव मोदी उनकी पत्नी अमी मोदी, भाई निशाल मोदी और गीतांजलि के प्रमोटर मेहुल चौकसी को पकड़ने के लिए इंटरपोल को भी अलर्ट कर दिया गया है। 


क्या था नीरव मोदी का घोटाला - 

 बैंको में स्विफ्ट सिस्टम के तहत लोन देने की व्यवस्था है इस सिस्टम से ट्रांजेक्शन नॉन cbs व्यवस्था के अंतर्गत आउट ऑफ़ इंडिया  होता है। बैंक ने अपने नियमो का उल्लंघन करके कई वर्षो से ऐसे स्विफ्ट ट्रांजेक्शन नीरव मोदी के फर्म के लिए किये। ऐसी व्यवस्था में बैंक गारंटर की भूमिका में होता है और विदेशी बैंक अपने देश में संचालित उस व्यक्ति के फर्म  को पैसा देते है ,बदले में गारंटर बैंक  विदेशी बैंक को और फर्म अपने बैंक को पैसा देता है । बिना अधिकारियों की अनुमति और बैंक की मिलीभगत के इतना बड़ा ट्रांजैक्शन मुमकिन नहीं। पंजाब नेशनल बैंक द्वारा विदेशी बैंको को भुगतान तो किया गया लेकिन फर्म द्धारा पंजाब बैंक को सालो से कोई भुगतान नहीं किया गया जो की बढ़ते हुए  लगभग 11000 करोड़ का हो गया यही घोटाला था।

सरकार और नीरव मोदी  -  

 सरकार  की कार्यवाहियों पे शक करने का कारण  पूर्व में  देश और जनता का पैसा लेकर भागे  अन्य  भगौडियो  पे कोई आशाजनक  कार्यवाही  न  होना है।  अन्य  कारणों  में  नीरव मोदी का  स्विट्जरलैंड में होना माना जा रहा  हैं। कारण वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ दावोस (स्विट्जरलैंड) में नामी भारतीय कंपनियों के मुख्य कार्यपालकों (सीईओ) के समूह के साथ फोटो में शामिल हैं। वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम के सम्मेलन की इस तस्वीर को 23 जनवरी को प्रेस सूचना ब्यूरो ने जारी किया था।  29  जनवरी को पंजाब नेशनल बैंक ने नीरव मोदी के खिलाफ पहली शिकायत की  और 30  जनवरी को एफ आई आर दर्ज की गई।

2019  के चुनाव और जनता के आक्रोश को देखते हुए बीजेपी द्धारा इसे कांग्रेस शासन काल से जोड़ा जा रहा है और जनता के बीच सरकार की छवि बचाने की कोशिश की जा रही है। 
सूचना  प्रौद्योगिकी के इस दौर में जहा एक - एक पैसा बैंको की निगाह में है वही इतना बड़ा घोटाला काफी कुछ कहता है। 

    इन्हे भी पढ़े  - 

नरेन्द्र मोदी और राहुल गांधी 



main aur wo


main aur wo
मैं और वो 



हमारे वास्तविक जीवन में कई घटनाये ऐसी होती है जो अपनी छाप हमारे जीवन में छोड़ जाती है और कुछ ऐसी होती है जो हमारी दिशा ही बदल देती है। अक्सर इस बदलाव का कारण कोई और होता है और जब बदलाव का कारण कोई  लड़की  होती है तो  उसे हम वो से सम्बोधित करते है।  


main aur wo
main aur wo

इन्ही सारी  कश्मकश के बीच कुछ रूहानी यादें रह जाती है और कहानी शुरू होती है , इन कहानियो  में अक्सर ही दो पात्र प्रमुख होते है एक मैं और एक वो यानी " मैं और वो "


जल्द ही इस ब्लॉग पे  " मैं और वो " नामक एक नई कहानी सीरीज शुरू होने जा रही है । आप भी अपनी रचनाये मैं और वो सीरीज में भेज सकते है।  सोमवार को इस सीरीज की पहली कहानी प्रकाशित होगी. उम्मीद है आप सब को अवश्य पसंद आएगी अपनी प्रतिक्रियाएं इस सीरीज और ब्लॉग के प्रति अवश्य दे।  आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है।                                             


                                                                                                             रायजी 


मजेदार  -  

#वैलेंटाइन दिवस के पटाखे 


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