amitabh aur raajneeti

                                              

अमिताभ बच्चन और राजनीति  - amitabh bachhan aur rajneeti 



amitabh aur raajneeti
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अमिताभ बच्चन एक ऐसी शख्सियत है जिनकी प्रसिद्धि अपने से सामानांतर अन्य कलाकारों से काफी ज्यादा है। 

ट्विटर से लेकर फेसबुक तक अनुयायियों की संख्या सर्वाधिक और  अदाकारी लाजवाब। मोदी सरकार में गुजरात के ब्रांड एम्बेसडर  और प्रधानमंत्री  मोदी के चहेते ।  

पिछले कुछ दिनों से ट्विटर पर राहुल गाँधी से लेकर कांग्रेस के अन्य नेताओ को अचानक से अनुसरण करने लगते है।  कांग्रेस पार्टी से अमिताभ बच्चन का पुराना  नाता रहा है राजीव गाँधी और अमिताभ की दोस्ती जग जाहिर थी। 

इसी दोस्ती के वास्ते उन्होंने सन 1984 में इलाहाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़ा था और उस दौर के कद्दावर नेता हेमवंती नंदन बहुगुणा को बुरी तरह से हराया था. इलाहबाद संसदीय क्षेत्र का वह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था अमिताभ ने चुनाव में 68.2 प्रतिशत के अंतर से जीत हासिल की। पर अमिताभ का राजनीतिक कॅरियर बहुत लम्बा नहीं चला बोफोर्स घोटाले में अखबारों में अपने परिवार का नाम आने पर अमिताभ ने 3 साल बाद ही सांसदी से अपना त्याग पात्र दे दिया। इसी साल अमिताभ की फिल्म शहंशाह  सिनेमाहाल में आई थी।  मुंबई में शिवसेना ने इसका काफी विरोध किया था। बोफोर्स का जिन्न  एक ऐसा जिन्न  है जो  सन  1989 में में कांग्रेस को ही  ले डूबा। 

हालांकि सन 2012 में स्वीडन की जांचकर्ता टीम ने अमिताभ बच्चन को क्लीन चिट  दे दिया था।पर इतने सालो तक उन्हें बोफोर्स से बदनामी ही मिली , बोफोर्स का दर्द अमिताभ ने अपने ब्लॉग  में भी किया था।उन्होंने लिखा की 25 साल तक  वो और उनका परिवार एक साजिश का शिकार रहा जिस वजह से उनको मानसिक यातना झेलनी पड़ी। 

अमिताभ बच्चन की ज़िन्दगी में एक दौर ऐसा आया जब  90 के दशक के बाद वे अपनी फिल्मो में कोई विशेष प्रदर्शन नहीं कर पा  रहे थे उसी समय उन्होंने abcl(अमिताभ बच्चन कार्पोरेशन लिमिटेड ) की स्थापना की कंपनी ने तेरे मेरे सपने नाम से अपनी पहली फिल्म  भी बनाई थी पर फिल्म  कुछ खास नहीं कर पाई  , कुछ और फिल्मो का भी निर्माण हुआ जिनमे अमिताभ बच्चन अभिनीत मृत्युदाता भी थी यह फिल्म भी कुछ ख़ास नहीं कर पाई इस तरह धीरे - धीरे अमिताभ बच्चन की कम्पनी भारी घाटे में जाने लगी.

बहुत कम  लोगो को पता होगा की  उनकी कंपनी ने मिस वर्ल्ड का भी प्रयोजन किया था जिसमे ख़राब प्रबंधन के कारण उन्हें काफी क्षति उठानी पड़ी और धीरे - धीरे इन्ही घाटों के चलते   बात उनके घर की नीलामी तक आ पहुंची पर अमिताभ का साथ एक बार फिर उनके मित्र अमर सिंह ने दिया बदले में अमिताभ ने उत्तर प्रदेश में उनकी समाजवादी पार्टी का प्रचार प्रसार किया , और उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाया। समाजवादी पार्टी से ही जया  बच्चन को राज्य सभा भेजा गया। और अब तक वे हर बार समाजवादी पार्टी से ही राज्यसभा पहुँचती आ रही है। 

कौन बनेगा करोड़पति से अमिताभ बच्चन की किस्मत ने एक बार फिर चमकना चालू किया उनकी शैली लोगो को भाने  लगी और धीरे - धीरे घर - घर में अमिताभ बच्चन ने फिर अपनी पहुँच और  प्रशंषको की संख्या में इजाफा करना प्रारम्भ  किया। उसी समय शाहरुख़ खान और अमिताभ बच्चन के बीच टकराव की पृष्ठभूमि पर आधारित मुहब्बतें प्रदर्शित हुई जो की सुपर - हिट साबित हुई और एक बार फिर अमिताभ का फिल्मी कॅरियर भी वापस पटरी  पर आने लगा। 

समाजवादी पार्टी की सरकार में ही अमिताभ पर बाराबंकी जिले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दलित किसानो की जमीन अपने नाम करने का आरोप लगा और अमिताभ को कोर्ट का सामना भी करना पड़ा इसी जमीन पर उन्होंने अपनी बहु के नाम से ऐश्वर्या राय  बच्चन महाविद्यालय बनाने की घोषणा भी की थी। ऐसा ही एक और फर्जी मामला महाराष्ट्र के पुणे में भी उजागर हुआ। 


ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड टैक्स हैवन देशो में से एक माना  जाता है  . इन्ही टैक्स हैवन देशो में जमा पूंजी को पनामा पेपर्स ने उनके जमाकर्ताओं के नाम के साथ उजागर किया है , पनामा पेपर्स समूह खोजी पत्रकारिता का एक समूह है जो इस तरह के मामलो को उजागर करता है उसकी लिस्ट में ऐसे 500 भारतीयों के नाम थे जिनमे से ३०० की पहचान कर ली गई है। 


इन्ही में से एक नाम अमिताभ बच्चन का था। इन देशो में फर्जी कंपनियों का निर्माण करके कला धन का निवेश किया जाता है। इन्ही कंपनियों के डाइरेक्टर में अमिताभ बच्चन का भी नाम था। प्रेस और जाँच एजेंसियो  द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने इसमें अपनी संलिप्तता से इंकार कर दिया और इसे अपने नाम का दुरूपयोग बताया। इन्ही वजहों के चलते  एक बार फिर उनका झुकाव समाजवादी पार्टी से भाजपा की और होने लगा हालाँकि वे पूर्व में उत्तर - प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के बाद गुजरात के भी ब्रांड एम्बेसडर बने जहा मोदी मुख्यमंत्री थे। 

पनामा पेपर में नाम आने के समय ही भाजपा सरकार के एक समारोह में उनके होस्ट को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किया जिसमे की प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल  थे। कांग्रेस ने कहा की अमिताभ बच्चन के खिलाफ केंद्र की जाँच एजेन्सिया जाँच कर रही है ऐसे में प्रधानमंत्री का उनके साथ दिखना इन जाँच एजेंसियो को गलत सन्देश जायेगा । 

हालांकि बाद में अमिताभ बच्चन ने समारोह में अपनी मौजूदगी से इंकार कर दिया। पनामा पेपर की जाँच में शामिल अंतराष्ट्रीय टीम का हिस्सा भारत भी है। 

पनामा के बाद एक और पेपर लीक मामला ऐसा आया जिसमे अमिताभ का नाम शामिल था ये था पैराडाइज़ पेपर्स लीक। पैराडाइज़ पेपर्स लीक  एक फर्जी कम्पनी बरमूडा  के माध्यम से कला धन को ठिकाने लगाने की व्यवस्था थी जिसमे अमिताभ बच्चन सिलिकॉन वैली  के नवीन चड्ढा के साथ शेयर  होल्डर थे।

इतने सारे विवादों और अमिताभ बच्चन की बदलती राजनीतिक निष्ठां कही न कही उनकी नियति पे संदेह जाहिर करती है। सत्ता के बदलते रुख के साथ उनकी निष्ठां भी बदलती रही है। आज वही अमर सिंह जो अमिताभ बच्चन को अपना बड़ा भाई मानते थे और अमिताभ बच्चन उन्हें अपना छोटा भाई राजनीतिक हाशिये का शिकार है और अमिताभ उनके आसपास कही खड़े नहीं दिखाई देते।  जिस कांग्रेस से उन्हें बोफोर्स जैसा दाग मिला और राजीव गाँधी के बाद जिससे उन्होंने अपना रिश्ता ख़त्म कर लिया उन्ही राजीव गाँधी के पुत्र को वे अर्से बाद ट्विटर पर फालो करते है। शायद कही उन्हें 2019 की हवा बदलते हुए तो नहीं दिख रही है जिसमे उनका राजनीतिक हित सुरक्षित रह सके। 

वर्तमान समय में अमिताभ बच्चन के प्रशंसकों की संख्या अच्छी खासी है ,लेकिन इतने सारे प्रशंसकों के होने के बावजूद अमिताभ बच्चन का अक्षय कुमार और सलमान खान की तरह कोई बड़ा सामाजिक सरोकार नहीं है , इस उम्र में भी अनेक तरह के विज्ञापनों को करना पैसे के प्रति उनकी  लालसा साफ़ तौर  पे इंगित करती है हालांकि उनके प्रशंसकों को ये बात बुरी लग सकती  है पर उन्हें भी इन सितारों की चमक के पीछे की वास्तविकता को समझना चाहिए। और उनकी बदलती नियति को लेकर समीक्षा अवश्य करनी चाहिए। 

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