fenku uncle

फेंकू चच्चा 


uncle
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हमारे गाँव मे एक ठो चच्चा हुआ करते थे फेंकू चच्चा . उनके फेंकने के किस्से दूर – दूर तक मशहूर थे . दूर – से मतलब अमेरिका से नही हाँ आसपास के गाँव, रिश्तेदारियो और जवार मे , चच्चा जब कभी रिश्तेदारियो मे जाते तो उनके आसपास भीड़ का रेला लग जाता था उनकी बातों के दीवाने घर के बच्चो से लेकर बूढ़े बुजुर्ग तक सभी थे . चच्चा अक्सर ही भ्रमण पे जाया करते थे थोड़ा घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के थे . वापस लौटकर आने पर बातों का भंडार रहता था .


चच्चा एक बार बता रहे थे की कैसे रास्ते मे उन्हे शेर मिल गया था , चच्चा उसे देखकर बिल्कुल भी नही डरे बल्कि शेर चच्चा को देखते ही उनके आगे नतमस्तक हो गया और पूरे जंगल मे उनके पीछे – पीछे घूमते रहा चच्चा उसे पालतू बनाकर घर ले आने लगे पर गाँव वाले उसे देखकर कही डर से मर ना जाये इसीलिये समाजहित मे उसे जंगल मे ही छोड़ आये . हम बच्चे जब तक छोटे थे तब तक चच्चा की कहानियो को सही मानते थे . जैसे की चच्चा बताते की उन्होने ही गब्बर सिंह को पकड के फिल्म शोले मे दिया था जिससे अमिताभ बच्चन उनका फैन हो गया था. अपनी जवानी मे वो सेना मे थे और उन्होने कैसे पाकिस्तान की नाक मे दम कर दिया था उनको देखते ही पाकिस्तानी डर के भाग खड़े होते थे .



चीनी तो उनको देखते ही हिन्दी बोलना शुरु कर देते थे . अमेरिका तक मे उनके चर्चे थे , एक बार हमने पूछ  ही दिया तब तो चच्चा इतिहास की किताबो मे आपका नाम जरूर होगा चच्चा बोले की वे नही चाहते थे की पाकिस्तानी और चीनी बच्चे उनके बारे मे पढ के पैंट गीला करदे भला इनमे बच्चो का क्या दोष . ऐसे लोगो की भी संख्या अधिक थी जिन्हे चच्चा और उनकी कहानियों पर पूर्ण निष्ठा थी . और वे चच्चा के खिलाफ कुछ भी सुनने को तैयार नही थे . चच्चा की फ्रेंड फालोविंग भी बड़ी लम्बी चौड़ी थी इसका करण था की चच्चा से बढिया मनोरंजन और मसाला फिल्मो के पास भी नही होता था .

और चच्चा की शैली मे लोगो को बांधे रखने की छ्मता थी वो वही सुनाते जो लोग सुनना चाहते थे , करना चाहते थे चाहे वो कल्पना मे ही क्यो ना हो . इधर गाँव मे प्रधानी के चुनावो की घोषणा हुई उधर चच्चा के चौपाल का दायरा बढ़ता गया . चच्चा को इस से बढिया मौका कहा मिलता अपनी काबिलयत दिखाने का सो वो भी चुनाव मे खड़े हो गये . चच्चा मे भीड़ जुटाने की काबिलियत तो थी ही सो उन्होने फिर अपनी बातो का मायाजाल फैलाना शुरु कर दिया , सबको लगा कुछ हो चाहे ना हो चच्चा का दिल नही दुखाना चाहिये नही तो बिना बिजली , सड़क के इस गाँव मे हमारा समय कैसे व्यतीत होगा औरतो को लगा की अगर चच्चा हार गये तो मर्द दिन रात घर मे पड़े उन्हे ही परेशन करते रहेंगे , बच्चो ने तो साफ – साफ कह दिया था की अगर उनके घर से चच्चा को वोट नही मिला तो वो भूख हड़ताल पे चले जायेंगे , तब – तब क्या चच्चा प्रधान हो गये . आज भी गाँव मे चच्चा के किस्सो के साथ चाय – पकौडो से ही लोगो का टाइम पास होता है .


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