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इस माह की १० सबसे लोकप्रिय रचनायें
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इश्क की दहलीज भाषा नैनो की जिनको आती है बिन चीनी की , चाय भी उन्हें भाती है मिलते हैं ऐसे हर गलियों में जैसे भंवरे हैं हर कलियों में कुछ...
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देशवा (भोजपुरी कविता ) साहब साहब कहके पुकार मत बाबू जेके देहले रहले वोट उहे ना बा काबू खेल बा सब सत्ता के और नेता हो गईल बाड़े बेकाब...
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जाति क्यों नहीं जाती ज़िन्दा थे तो बे बेनूर थे और मारके कोहिनूर बना दिया हुक्मराणो ...
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मन , हम और बदलता मौसम नौकरी का झमेला और शहरो में परिवार चलाने की कशमकश में मन हमेशा इसी उधेड़बुन में लगा रहता है की, क्या...
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अबकी बार नहीं चाहिए ऐसी सरकार खेलावन के लइका और खेलावन दोनों ही भन्सारी की दुकान से एक एक थो पान चबाते हुए चले आ रहे थे। सामने म...
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शहजादा और देश वंशवाद की बेली में एक फूल खिला है, हवेली में बेला , गुलाब,गुड़हल और गेंदा विलक्षण फूल, नहीं इन जैसा मात ...
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कोरोना , मजदूर और जिंदगी घर पर रहते हुए भी सुकून का ना होना मजदूरो और कामगारो के लिए कोई नया नहीं है | लेकिन कोरोना से बचने के चक्कर में ...
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करतार सिंह सराभा 15 अगस्त 1947 की वह सुबह पूरे भारतवासियों के लिए न केवल आजादी के खूबसूरत एहसास से भरी थी, बल्कि दिलों में एक कसक लिए हुए ...
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राजनीति पे कविता poem on politics जबसे आप मशहूर हुए कई अपने आप से दूर हुए अब तो आप ही आप है दिल्ली मे जिक्र होता...
SPECIAL POST
uff ye berojgaari
उफ्फ ये बेरोजगारी - uff ye berojgari कहते है खाली दिमाग शैतान का पर इस दिमाग में भरे क्या ? जबसे इंडिया में स्किल डिव्ल्पमें...

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