सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
इस माह की १० सबसे लोकप्रिय रचनायें
-
इश्क की दहलीज भाषा नैनो की जिनको आती है बिन चीनी की , चाय भी उन्हें भाती है मिलते हैं ऐसे हर गलियों में जैसे भंवरे हैं हर कलियों में कुछ...
-
देशवा (भोजपुरी कविता ) साहब साहब कहके पुकार मत बाबू जेके देहले रहले वोट उहे ना बा काबू खेल बा सब सत्ता के और नेता हो गईल बाड़े बेकाब...
-
जाति क्यों नहीं जाती ज़िन्दा थे तो बे बेनूर थे और मारके कोहिनूर बना दिया हुक्मराणो ...
-
मन , हम और बदलता मौसम नौकरी का झमेला और शहरो में परिवार चलाने की कशमकश में मन हमेशा इसी उधेड़बुन में लगा रहता है की, क्या...
-
जिंदगी की सार्थकता zindagi ki sarthakta zindaagi ki saarthakta उगते सूरज को देखते हुए ये ख्याल आता है की हम भी जगत मे इसी तरह ...
-
भाई साहब बचपन से ही भाई साहब का अस्पष्ट नजरिया हमेशा ही मुझे कुछ दुविधा में डाले रहता था । उधर भाई साहब इसके उलट मुझे ही आ...
-
करतार सिंह सराभा 15 अगस्त 1947 की वह सुबह पूरे भारतवासियों के लिए न केवल आजादी के खूबसूरत एहसास से भरी थी, बल्कि दिलों में एक कसक लिए हुए ...
-
राजनीति पे कविता poem on politics जबसे आप मशहूर हुए कई अपने आप से दूर हुए अब तो आप ही आप है दिल्ली मे जिक्र होता...
-
बीजेपी की राजनीति की नाव मे जनता द्वारा छेद bjp ki raajneeti ki naw me janta dwara chhed बीजेपी की मौजूदा हार को ...
SPECIAL POST
uff ye berojgaari
उफ्फ ये बेरोजगारी - uff ye berojgari कहते है खाली दिमाग शैतान का पर इस दिमाग में भरे क्या ? जबसे इंडिया में स्किल डिव्ल्पमें...


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें